गुरुवार, 17 नवंबर 2016

dashhara akhodekha - v.k. mehra

                                व्यंग्य-दशहरा आॅखो देखा 

                                व्यंग्य-दशहरा आॅखो देखा

    आज दशहरा है और हमारा बच्चा दशहरा (रावण) देखने के लिए लालायित था। हम उसे रावण दिखाने ले गए। वहाॅ देखा तेा 30-40 पुलिस वाले रावण के पुतले की रक्षा कर रहे थे।
बालक ने हमसे पूछा- पापा रावण तो बुरा होता है तो फिर रावण की रक्षा मे पुलिस क्यों लगी है ?
हमने कहा - बेटा, पुलिस रावण की सेफटी के लिए है, कही कोई आसामाजिक तत्व रावण को नुकसान न पहुॅचा दें।
    इतने मे रावण को बनाने वाला शख्स हमारे सामने आ गया किसी ने उससे पूछा - भैया इस साल का रावण तो बहुत छोटा बनाया है ?
वो बोला - इसे बनाने में ही हम दस आदमी तीन दिनों से लगातार मेहनत कर रहे हैं और इसे बनाने में लगभग पचास हजार रूपये का खर्चा आया है। वो बडे गर्व से बता रहा था, एक रावण को अपने पैरों पर खडा करने मे कितना मानव श्रम लगा और कितनी लागत आई।
बालक पूछ बैठा- पापा रावण को बनाने मे इतना खर्चा क्यों किया गया ?
मै कुछ नही बोल सका। इतने में राम, लक्ष्मण हाथ मे धनुष बाण लिए प्रांगण मे आ गए, राम ने धनुष बाण निकाला और रावण से बोले - तेरा क्या होगा रावण, तुझे तो मै जलाकर राख कर दूॅगा।
अचानक रावण भी बोल उठा - हा, हा, हा जाओ, पहले उस आदमी को जलाकर आओ जिसने माॅ, बहन की इज्जत पे हाथ डाला, जाओ पहले उस आदमी को जलाकर आओ जिसने गरीबो का खून चूसा, जाओ पहले उस आदमी को जलाकर आओ जिसने खूब भ्रष्टाचार किया, उसके बाद तुम जैसे चाहो वैसे मुझे जला सकते हो, मार सकते हो।
    जिसने भ्रष्टाचार किया वो तो हममे से एक है जिसने गरीबो का खून चूसा, वो भी हमसे एक है और जिसने माॅ-बहन की इज्जत पर गलत नजर डाली वो तो हमारे गुरू रहे है वो भी हमसे से एक है, पर रावण, तुम हममें से एक नही हो, तुम्हें तो मरना ही होगा।
    रावण बोला- अगर तुम इन लोगो को पहले जलाकर नही आते तो मै तुम सभी लोगो को शाप देता हूॅ कि हर वर्ष मुझे बनाना होगा और जबरदस्ती मुझे जलाया जाएगा।
    राम ने आग लगा बाण छोडा और रावण मे आग लग गयी।
    रावण धमाके की आवाज के साथ जल उठा। जोर जोर से पटाखो के धमाको की आवाज आने लगी।
    तभी हमारा बेटा हमसे बोला- पापा रावण कितनी जोर जोर से हॅस रहा है।
                               

                                                                                              विजय कुमार मेहरा द्वारा संजय सिरवैया
                                                                                                  लक्ष्मी टाकीज के पास टीकमगढ़
                                                                                                                        म0 प्र0

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