आजकल भारत मे कुछ नया हो रहा है तो वो है यहा के धोटाले... यहा अलग अलग प्रकार के लोगो द्वारा अलग अलग प्रकार के धोटाले किये जा रहे है और समझने वाली बात है कि यहा का आम आदमी इन धोटालो को समझ भी नही पा रहा है ?
अगर सयुक्त राष्ट्र अमेरिका की तरह यहा प्रधान मंत्री के पद की दावेदारी बाले दो पाटी के नेताओ की बहस करा दी जाये तो पूरी बहस अतीत के धोटालो पर ही समर्पित हो जायगी तथा देश का क्या भविष्य होगा क्या नितिया होगी और क्या विकास होना चाहिए इसके लिए शायद समय ही न बचे ?
अगर सयुक्त राष्ट्र अमेरिका की तरह यहा प्रधान मंत्री के पद की दावेदारी बाले दो पाटी के नेताओ की बहस करा दी जाये तो पूरी बहस अतीत के धोटालो पर ही समर्पित हो जायगी तथा देश का क्या भविष्य होगा क्या नितिया होगी और क्या विकास होना चाहिए इसके लिए शायद समय ही न बचे ?