बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

bhartiya rajniti

आजकल भारत मे कुछ नया हो रहा है तो वो है यहा के धोटाले... यहा अलग अलग प्रकार के लोगो द्वारा अलग अलग प्रकार के धोटाले किये जा रहे है और समझने वाली बात है कि यहा का आम आदमी इन धोटालो को समझ भी नही पा रहा है ?                
                                   अगर सयुक्त राष्ट्र अमेरिका की तरह यहा प्रधान मंत्री के पद की दावेदारी बाले दो पाटी के नेताओ की बहस करा दी जाये तो पूरी बहस अतीत के धोटालो पर ही समर्पित हो जायगी तथा देश का क्या भविष्य होगा क्या नितिया होगी और क्या विकास होना चाहिए इसके लिए शायद समय ही न बचे ?

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

भारतीय राजनीति तथा आर्थिक और समाजिक परिवेश मे इतनी उथल पुथल और गंदगी पहले कभी देखने को नही मिली आज हर राजनीतिक दल और व्यकित मानने लगा है दाग अच्छे है जो किसी भी टिकिया से नही धुल सकते आम आदमी को आम ही मानकर सब उसका रस निकालने मे लगे है सभी भ्रष्टाचार को कुरुप तो मानते है परंतु इसकी सर्जरी से किसी को परहेज नही रहा गाधी नेहरु शास्त्री का देश आज अपने ही लोगो से परेशान है अर्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व हमेशा से ही सूना रहा है किसी एक समस्या पर सुझाव या वार्ता को मौन अनुमति ही समझ आती है.......