भारतीय राजनीति तथा आर्थिक और समाजिक परिवेश मे इतनी उथल पुथल और गंदगी पहले कभी देखने को नही मिली आज हर राजनीतिक दल और व्यकित मानने लगा है दाग अच्छे है जो किसी भी टिकिया से नही धुल सकते आम आदमी को आम ही मानकर सब उसका रस निकालने मे लगे है सभी भ्रष्टाचार को कुरुप तो मानते है परंतु इसकी सर्जरी से किसी को परहेज नही रहा गाधी नेहरु शास्त्री का देश आज अपने ही लोगो से परेशान है अर्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व हमेशा से ही सूना रहा है किसी एक समस्या पर सुझाव या वार्ता को मौन अनुमति ही समझ आती है.......
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