मंगलवार, 22 जनवरी 2013

vaid भारतीय सन्दर्भ मे....

वेद........भारतीय सन्दर्भ

धरती पर सभी ज्ञान का स्त्रोत वेद ही है। ये मौखिक रुप से एक पीढी से दूसरी पीढियो तक पृथ्वी मे विचरित है वेद चार है ऋग्वेद जिसमे मुख्य रुप से स्तुतिया है यजुर्वेद जिसमे यज्ञो की विधिया का वर्णन है सामवेद मे गीतो की चर्चा है और अर्थवेद मे बहुत सारे जादू टोने है ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ है इसमे रहस्य से चमत्कृत करने वाले मंत्रो का उदगार है इसमे प्रकृति का सुरम्य वर्णन है तथा यह जीवन के रहस्य को उजागर करता है इसमे देवताओ विशेषत इन्द्र की स्तुतिया भी हुयी है ऋग्वेद का ध्येय देवताओ जैसा बनना है जीवात्मा परमात्मा बन सकती है ऋग्वेद मे परमात्मा की तुलना एक बढर्इ या लुहार से की गयी है जो जगत को गढता है या ढालता है
     यजुर्वेद का अर्थ गध है वेदकालीन लोगो का विश्वास था कि जगत का पूर्णतया नियंत्रण यज्ञ करता है वैदिक कालीन समाज यज्ञो से देवताओ को प्रसन्न करता था ताकि वे प्रजा पर सुख समृद्धि की वृषिटपात कर सके यज्ञ से पर्यावरण की शुद्धि होती है यज्ञ की उध्र्वगति होने के कारण इससे उठने वाला धूम जितनी उपर उठती जायेगी वायुमंडल उतना ही प्रवाहित होता जायेगा अगिन पृथ्वी की गंदी तथा हानिकारक वस्तुओ को जलाती है
    सामवेद का अर्थ है सुंदर सुखकर आनंददायक वचन संगीत को सर्वाधिक सुखकर और आंनददायक माना गया है इनका उदगार स्वर ताल बद्ध वाणी द्धारा गार देवी देवताओ को प्रसन्न करता है
    अर्थवेद मे दानवी शकितयो के लिए प्रार्थनाए है जो हमारे जीवन मे व्याधि और विपतित लाती है कौटिल्य के अर्थशास्त्र का स्रोत यही है यह चिकित्सा विज्ञान का आरम्भ ग्रंथ है मातृभूमि की स्तुति मे गाया गया इसका पृथ्वी सूक्त अत्यन्त प्रसिद्ध है
         कहा गया है कि मातृभमि के प्रति अनुपम निष्ठा और प्रेम का उदाहरण विश्व साहित्य मे उपलब्ध नही है ऋग्वेद का आखिरी सूक्त भी हमारी पृथ्वी पर बसुधैव कुटुम्बकम की भावना से एक होकर सुखपूर्वक रहने की कामना करता है तथा सन्देश देता है ।
                                                                         

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